वाराणसी — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देश का पहला सार्वजनिक परिवहन रोपवे (Public Transport Ropeway) तेजी से आकार ले रहा है। यह परियोजना न केवल शहर के ट्रैफिक जाम को कम करेगी बल्कि काशी के पर्यटन और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को नई ऊँचाइयाँ देगी। हालांकि, फिलहाल लोड टेस्ट (Load Test) को स्थगित कर दिया गया है और इसे दोनों चरणों के पूर्ण होने के बाद किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि फरवरी 2026 तक पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
देश का पहला रोपवे बनेगा वाराणसी में
वाराणसी का यह रोपवे प्रोजेक्ट देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है जिसे सार्वजनिक परिवहन के रूप में तैयार किया जा रहा है। यह परियोजना कुल 3.8 किलोमीटर लंबी होगी और इसमें 5 प्रमुख स्टेशन बनाए जा रहे हैं — कैंट स्टेशन, वाराणसी सिटी, गिरजाघर, चौफटका और काशी विद्यापीठ।
परियोजना के पूरा होने पर हर दिन हजारों यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। खास बात यह है कि यात्री कुछ ही मिनटों में कैंट से काशी विद्यापीठ तक की दूरी तय कर सकेंगे। इससे वाराणसी की तंग गलियों और व्यस्त सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या में भारी कमी आएगी।

फरवरी तक पूरा होगा काम
नगर निगम और रोपवे कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि काम को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। पहले चरण में टावर निर्माण, केबल बिछाने और स्टेशन संरचना का काम लगभग पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में सिस्टम परीक्षण और लोड टेस्टिंग की तैयारी की जा रही है।
लोड टेस्ट तभी किया जाएगा जब दोनों चरणों का काम पूर्ण हो जाएगा। फिलहाल इंजीनियरिंग टीम ने तकनीकी निरीक्षण के बाद कुछ सुधारों की सिफारिश की है, ताकि परीक्षण के दौरान कोई तकनीकी बाधा न आए।
815 करोड़ की लागत से बनेगा प्रोजेक्ट
पूरे रोपवे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 815 करोड़ रुपये है। यह पूरी तरह से अत्याधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा है। केबल और गोंडोला (कैबिन) की सुरक्षा के लिए तीन-स्तरीय सिस्टम लगाया जाएगा जिसमें ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम और इमरजेंसी रेस्क्यू की सुविधा भी रहेगी।
प्रत्येक गोंडोला में 8 से 10 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी और ये लगातार “ऑन-ऑफ” सेवा प्रदान करेंगे। इसका मतलब यह है कि यात्री किसी भी स्टेशन पर तुरंत उतर या सवार हो सकेंगे।
वाराणसी की ट्रैफिक समस्या का समाधान
वाराणसी की तंग सड़कों पर अक्सर ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या बनी रहती है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं जिससे सड़कों पर अत्यधिक दबाव रहता है। ऐसे में रोपवे प्रोजेक्ट इस भीड़भाड़ को कम करने का एक कारगर विकल्प बनेगा।
प्रोजेक्ट के शुरू होने से कैंट स्टेशन से काशी विद्यापीठ तक का सफर मात्र 16 मिनट में पूरा होगा। जहां पहले यही दूरी तय करने में आधे घंटे से अधिक समय लगता था।
सुरक्षा और तकनीकी मानक
रोपवे सिस्टम में तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था होगी। इसमें
स्वचालित ब्रेकिंग सिस्टम,
आपातकालीन नियंत्रण कक्ष,
रियल-टाइम मॉनिटरिंग सेंटर शामिल होगा।
भारतीय रोपवे तकनीक को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा मानकों को लागू किया जा रहा है। हर गोंडोला को जीपीएस सिस्टम से जोड़ा जाएगा ताकि उसकी रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो सके।
पर्यावरण और स्वच्छता पर भी ध्यान
वाराणसी रोपवे न केवल ट्रैफिक कम करेगा बल्कि प्रदूषण घटाने में भी मददगार साबित होगा। यह परियोजना ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल के तहत बनाई जा रही है, जिसमें ऊर्जा दक्षता और कार्बन उत्सर्जन कम करने पर फोकस है।
इसके साथ ही, 15 वाराणसी म्युनिसिपल अधिकारियों और स्वच्छता टीम को भी इस योजना में शामिल किया गया है ताकि सभी स्टेशन और टावर के आसपास स्वच्छता बनी रहे।
पर्यटन को भी मिलेगी रफ्तार
वाराणसी देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र है। रोपवे के शुरू होने से पर्यटक शहर के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को ऊपर से देख पाएंगे, जिससे पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।
पर्यटन विभाग का अनुमान है कि रोपवे शुरू होने के बाद वाराणसी में पर्यटकों की संख्या में 20% की वृद्धि होगी।
निष्कर्ष
वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट भारत के परिवहन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह न केवल यात्रा को सुविधाजनक बनाएगा बल्कि वाराणसी के विकास को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
फरवरी तक जब यह परियोजना पूरी तरह तैयार होगी, तो वाराणसी देश का पहला शहर बन जाएगा जहां सार्वजनिक परिवहन के रूप में रोपवे चलेगा। यह वास्तव में “नए भारत की नई उड़ान” का प्रतीक होगा।
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