एम-पैक्स योजना किसानों को अब मिलेगा सस्ता ऋण और खाद की मिलेगी प्राथमिकता

एम-पैक्स योजना देश में खेती-किसानी को सशक्त बनाने और किसानों को समय पर खाद, बीज और ऋण की सुविधा देने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। इन्हीं प्रयासों के तहत उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब राज्य के किसान एम-पैक्स योजना (Multi-Purpose Primary Agricultural Credit Society) से तेजी से जुड़ रहे हैं, जिससे उन्हें उर्वरक और कृषि ऋण पाने में प्राथमिकता मिल रही है।

34 दिनों में 11 लाख किसानों ने ली एम-पैक्स की सदस्यता

सहकारिता विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, केवल 34 दिनों में ही 11 लाख किसानों ने एम-पैक्स की सदस्यता ले ली है। यह दर्शाता है कि किसान इस नई व्यवस्था को अपनाने के लिए कितने उत्साहित हैं। एम-पैक्स से जुड़ने के बाद किसानों को न केवल उर्वरक मिलने में आसानी होगी, बल्कि वे तीन प्रतिशत ब्याज दर पर खेती के लिए ऋण भी प्राप्त कर सकेंगे।

सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक किसान को उसकी जरूरत के अनुसार समय पर उर्वरक और वित्तीय सहायता मिल सके। पहले कई बार देखा गया था कि उर्वरक वितरण में विलंब और असमानता की वजह से किसानों को फसलों की बुवाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब एम-पैक्स से जुड़ने वाले किसानों को प्राथमिकता के आधार पर खाद, बीज और ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

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सहकारी बैंकों की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत

एम-पैक्स की सदस्यता अभियान से प्रदेश की जिला सहकारी बैंकों की स्थिति भी मजबूत हुई है। नए सदस्य बनने वाले किसानों ने इन बैंकों में नए खाते खुलवाए हैं और शेयरधारक के रूप में राशि जमा की है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लगभग 255 करोड़ रुपये इन खातों में जमा हो चुके हैं। इससे सहकारी संस्थाओं की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिला है।

किसानों को मिलेगा सस्ता ऋण और प्राथमिकता आधारित सुविधा

सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एम-पैक्स से जुड़ने वाले किसानों को तीन प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालिक कृषि ऋण दिया जाएगा। इसके अलावा, जब भी खाद, बीज या अन्य कृषि सामग्री की खरीद होती है, तो एम-पैक्स के सदस्य किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इसका अर्थ यह हुआ कि जो किसान एम-पैक्स के सदस्य हैं, उन्हें न केवल समय पर खाद मिलेगी बल्कि कम ब्याज दर पर ऋण भी प्राप्त होगा, जिससे उनकी खेती की लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा।

एम-पैक्स से बढ़ेगा किसानों का आत्मनिर्भरता भाव

एम-पैक्स योजना किसानों को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी गति दे रही है। इस योजना के तहत किसानों को स्थानीय स्तर पर ही सहकारी समितियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसल उत्पादन से लेकर विपणन तक हर कदम पर सहयोग मिल रहा है।

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अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान समय में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 8140 एम-पैक्स समितियां सक्रिय हैं। इन समितियों से पहले से ही करीब एक करोड़ किसान सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं। अब नए अभियान के तहत 12 सितंबर से शुरू हुई सदस्यता प्रक्रिया में 11 लाख नए किसान भी जुड़ चुके हैं।

नए खातों से बढ़ा बैंकिंग समावेशन

एम-पैक्स के साथ किसानों का जुड़ाव ग्रामीण बैंकिंग को भी मजबूती दे रहा है। नए सदस्य बनने के बाद किसानों ने जिला सहकारी बैंकों में लगभग 1.25 लाख नए खाते खुलवाए हैं। इन खातों में अब तक 230 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा की जा चुकी है। इसके अलावा किसानों द्वारा शेयर के रूप में लगभग 25 करोड़ रुपये भी बैंकों में जमा किए गए हैं।

किसानों में उत्साह और भरोसा बढ़ा

एम-पैक्स से जुड़ने के बाद किसानों में एक नया उत्साह देखा जा रहा है। उन्हें भरोसा है कि अब उन्हें उर्वरक, बीज और अन्य कृषि संसाधन समय पर और प्राथमिकता के साथ मिलेंगे। पहले जहां सहकारी संस्थाओं तक सीमित पहुंच के कारण किसान निजी दुकानदारों पर निर्भर रहते थे, अब एम-पैक्स उन्हें एक भरोसेमंद और पारदर्शी विकल्प दे रहा है।

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निष्कर्ष

एम-पैक्स योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक ऐतिहासिक पहल है, जो न केवल किसानों को वित्तीय रूप से सक्षम बना रही है बल्कि सहकारी तंत्र को भी मजबूत कर रही है। इससे खेती-किसानी का स्वरूप बदलने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। आने वाले समय में जब यह योजना पूरे प्रदेश के हर किसान तक पहुंचेगी, तब उर्वरक और कृषि ऋण से जुड़ी सभी समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो जाएंगी।

एम-पैक्स का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें तकनीकी व वित्तीय रूप से सशक्त करना है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले वर्षों में एम-पैक्स ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ साबित होगा।

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